शनिवार, अक्टूबर 16, 2010

कुछ लोग मुझे बहुत ही नेगटिव खयालात वाला इंसान मानते हैं। गलत तो नहीं है लेकिन उन्हें हकीक़त पता नहीं है। दरअसल मुझे नेगटिव बाते करने में खूब मज़ा आता है। नेगटिव बाते करके मैं लोगो को खूब परेशान करता हूँ। वैसे भी मेरी नज़र में पोजेटिव बातों से सिर्फ दिल बहलाया जा सकता है जबकि नेगटिव बातों से दिल के भरास निकले जा सकते हैं। क्या सही कहा ना.............................

सोमवार, मई 10, 2010

शेर फिर ढेर

मुबारक हो, हमारी टीम इंडिया ने फिर से २००९ का अपना इतेहास दोहरा दिया। २०१० के २०-२० वर्ल्ड कप क्रिकेट मुकाबले मैं हमारी टीम सुपर ८ से ही बाहर हो गई। ये तो होना ही था। आइपीअल की तरह कौन सा इस टूर्नामेंट मैं हमारे खिलारियौं को करोरों पैसा मिल रहा था जो वो अपना दम ख़म दिखाते।
भाई हमारे देश के खिलारी पूरी तरह से प्रोफेशनल हो चुके हैं। मोटी रक़म दो तभी वो अच्छा खेलेंगे। देख लो आइपीअल मैं मिला तो अच्छा खेले २०-२० मैं मोटी रक़म नहीं दिया तो तुम्हारी गलती है। यानि अब इनसे देशभक्ति की उम्मीद मत करो। पैसा दो पैसा। भार मैं गई तुम्हारी देशभक्ति। तुम पैसा कमाओ तो कुछ नहीं हमने उम्मीद की तो देशभक्ति का आइना दिखा रहे हो। आइपीअल मैं तुमने भी तो अरबो कमाया है। उसका हिसाब दिया कभी इनकम टैक्स वालों को। फिर हमसे किस मुंह से उम्मीद करते हो.